CMS ED को लेकर लोगों के मन में कई सवाल होते हैं. यहां CMS ED क्या है, इसका असली उद्देश्य क्या है, यह कैसे किया जाता है और इससे जुड़े सच को आसान, इंसानी और देसी भाषा में समझाया गया है.

CMS ED आज भी उन कोर्सों में से एक है जिसके बारे में लोग आधा-अधूरा सुनते हैं और फिर उलझ जाते हैं. खासकर ग्रामीण इलाकों में यह नाम बहुत चलता है, लेकिन असल में CMS ED है क्या, यह किस काम आता है और इसे लेकर सही जानकारी क्या है, यह बहुत कम लोगों को पता होता है. इसलिए आज हम CMS ED से जुड़ी सारी जरूरी बातें आपको बिल्कुल सीधी, साफ और आसान भाषा में समझाने वाले हैं ताकि जिसे पढ़ो, वही तुरंत समझ में आ जाए.

CMS ED क्या है और लोग इसे इतना क्यों सर्च करते हैं

CMS ED का पूरा नाम Community Medical Services and Essential Drugs है. नाम सुनकर लगता है कि यह कोई मेडिकल डिग्री है, लेकिन असलियत कुछ और है. CMSED को कई जगह एक तरह के पैरामेडिकल या कम्युनिटी-हेल्थ टाइप सर्टिफिकेट के रूप में चलाया जाता है. लोग इसे इसलिए सर्च करते रहते हैं क्योंकि कई जगह इसे फर्स्ट एड या बेसिक हेल्थ सर्विस के नाम पर प्रचारित कर दिया जाता है.

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CMS ED को लेकर लोगों में यह गलतफहमी भी रहती है कि इसे करके क्लिनिक खोल सकते हैं या डॉक्टर जैसा काम कर सकते हैं. जबकि ऐसा कानून में कहीं भी मान्य नहीं है. हकीकत यह है कि CMSED कोई डॉक्टर बनाने वाला कोर्स नहीं है और न ही यह किसी तरह की मेडिकल प्रैक्टिस की अनुमति देता है.

CMS ED का असली उद्देश्य क्या बताया जाता है

CMSED का असली उद्देश्य हेल्थ अवेयरनेस, बेसिक दवाइयों और सामान्य प्राथमिक उपचार के बारे में जागरूकता बढ़ाना बताया जाता है. मतलब आप यह समझ लो कि यह ज्यादा से ज्यादा एक बेसिक स्तर की जानकारी देने वाला कोर्स माना जाता है जो लोगों को छोटे-मोटे प्राथमिक उपचार के बारे में बताता है.
लेकिन इसका दायरा बहुत सीमित है.

बहुत सारे लोग सोच लेते हैं कि CMSED करने से वे इंजेक्शन लगा सकते हैं, दवाइयां लिख सकते हैं या फिर क्लिनिक खोल सकते हैं. यही सबसे बड़ी गलतफहमी है. भारत में मेडिकल काम करने के लिए कौन-कौन से डिग्री मान्य हैं, यह सब कानून में साफ-साफ लिखा है.

CMS ED को लेकर सबसे बड़ा कन्फ्यूजन कहाँ होता है

CMSED को लेकर सबसे बड़ा कन्फ्यूजन यही है कि इसे ऐसे प्रचारित कर दिया जाता है जैसे यह कोई बड़ा मेडिकल कोर्स हो. जबकि ऐसा नहीं है.
दूसरी समस्या यह है कि CMSED को लेकर इंटरनेट पर बहुत मिलाजुला कंटेंट है. किसी जगह इसे मान्य बताकर दिखाया जाता है, किसी जगह सीधा अवैध बताया जाता है, और लोग इसी में उलझ जाते हैं.

असल बात यह है कि CMSED न तो डॉक्टर बनाता है और न ही इससे कोई मेडिकल प्रैक्टिस या क्लिनिक की परमिशन मिलती है. यह बात हर जगह बहुत साफ तरीके से नहीं बताई जाती और लोग गलत जानकारी में फंस जाते हैं.

CMS ED करने के बाद क्या कर सकते हैं और क्या नहीं

CMS ED करने के बाद व्यक्ति प्राथमिक स्वास्थ्य जागरूकता अभियान, हेल्थ कैंप में असिस्टेंट की भूमिका, बेसिक फर्स्ट एड गतिविधियों में सहयोग या कम्युनिटी लेवल पर अवेयरनेस टीम के साथ काम कर सकता है.
लेकिन मेडिकल प्रैक्टिस, प्राइवेट क्लिनिक खोलना, दवाइयां लिखना, इंजेक्शन लगाना, मरीजों का इलाज करना, कोई भी उपचार देना – ये सब CMS ED में मान्य नहीं है.

जिन लोगों को यह लगता है कि CMSED उनके लिए डॉक्टर बनने का शॉर्टकट है, उन्हें यह बात समझनी चाहिए कि भारत में मेडिकल का काम बहुत सख्त नियमों के तहत होता है और CMSED उन मानकों में फिट नहीं बैठता.

CMS ED की जगह लोग क्या करें

कई लोग CMSED करते हैं क्योंकि उन्हें हेल्थ सेक्टर में काम करना पसंद है. ऐसे लोगों के लिए बेहतर विकल्प यह है कि वे मान्यता प्राप्त पैरामेडिकल कोर्स करें, जैसे फर्स्ट एड कोर्स, इमरजेंसी रिस्पॉन्स कोर्स, कम्युनिटी हेल्थ ट्रेनिंग या स्किल-आधारित स्वास्थ्य कार्यक्रम.
इनकी मान्यता साफ होती है और काम करने के लिए कोई भ्रम भी नहीं रहता.

अगर कोई फ्यूचर में हेल्थ सेक्टर में ग्रोथ चाहता है, तो उसे हमेशा वही ट्रेनिंग चुननी चाहिए जिसे सरकारी स्तर पर या मान्यता प्राप्त संस्थाओं द्वारा स्पष्ट रूप से स्वीकार किया गया हो.

CMS ED का सच जानना क्यों जरूरी है

CMSED का सच इसलिए जानना जरूरी है क्योंकि कई बार लोग गलतफहमी में पैसा खर्च कर देते हैं, बाद में पता चलता है कि यह कोर्स मेडिकल काम में काम ही नहीं आता.
दूसरी बात, गलत जानकारी के कारण कानूनी जोखिम भी हो सकता है. अगर कोई सोच ले कि CMS ED करके वह क्लिनिक खोल सकता है, दवाइयां दे सकता है या मरीज देख सकता है, तो यह सीधे कानून के खिलाफ जा सकता है.

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